💐क्या कहें किससे कहें।सब तरफ अपने आप से सब मशगूल हैं ।सब इस तरह की हम कमोबेश काम से ही नज़र आतें है। दौड़ती है जिंदगी कुछ इस रफ्तार से के हम पीछे से छूटे जाते है। कहें दिल की किससे के सब अपने में ही उलझे जाते हैं। जी भरें किससे की सब पहले ही खाली नज़र आतें है। जिधर नज़र उठती है एक अजीब सी दौड़ लगी है हसरतों की। हम उसमे कहीं कम ही नज़र आतें है। कहीं हम चाहे भी के कोई बिना प्रश्न हमसे हमारे साथ कुछ कदम भर तो चले। चलने से पहले ही इतने प्रश्न लिए खड़े हैं की सब उनकी आंखों में देख के हम अकेले ही चले जाते हैं। फिर सोच के के क्यों उलझें किस लिए उलझें सब बातों पे अपनी पर्दा डाल देते हैं हम। कभी किसी की सोच से आगे निकलने की कोई तमन्ना नही। बहुत से तमगे सब दिए जाते है। हम सोच के हैरां है कि कमबख्त इतने असहाये है हम। जिसे देखो चपत लगा के निकल जाता है। हम ठगे से यू ही बस यूं ही देखते रह जाते है। कुछ अपने कर जाते है बाहर की तो रहने ही दो। दुनिया का अंदाज़े बयान ही और है। हम पहले भी समझने में नाकाम थे आज भी नाकाम है। फिर सोचते हैं कि काहे हम उलझते है। ध्यान लगाओ बचे दिनों पे जिंदगी तो रफ्तार से निकली जाती है। कुछ इस शरीर ने धोखा ही दे दिया है बस। काहे उलझते हो राजीव बाबू । न ये दुनिया किसी के बस में थी न होगी। कोई हुआ है किसी का जो हुए वो हसरतों के हुये। हम तो हर बार हार के ही निकल जाते है।ये बार भी कोई उम्मीद बिना कोई आस से दूर अपने शब्द लिखते हुऐ कहीं दूर सोचों में मन की उड़ान भरे जा रहें है। बचे दिनों को भी हवा से फुर्र हो जाना है। कितने दिन किसके बचे हैं ये फुर्सत अब कहाँ। बीते दिनों का गम न करो आज तो हमारा है ही कल किसने देखा है भई। आंखें बंद उम्मीद फुर्र। आज ही जी लेते है कुछ बची हसरतों को अगर इज़ाज़त मिले तो कुछ पल जी लेते है। कोई शुभा नहीं किसी से कोई गिला नहीं हमारा ।ये जिंदगी उम्मीद से भरी रही उम्मीद से कटती रही जो बची वो उम्मीद के नाम कर ही दी गयी। उम्मीद बनाये रखिये लोग आते जाते रहेंगे । कुछ आप के साथ हसीन पल ले उड़ेंगे कुछ दुख का गुब्बार निकाल के निकल लेंगे। कुछ अपने हसीन यादें छोड़ जाएंगे किसी को आप दे जाओगे। किसी को आप दिल में बिठा लोगे कोई आप को बिठा ले जायेगा पर इन सब में हर कोई किसी एक मुकाम पे आप से दूर या आप को छोड़ कर तो जाएगा। तो काहे का गम किस का गम और क्यों गम। हंसो और जोर से हँसो खिल खिला के हँसो के जिन्दगी तुम्हारी है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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