Skip to main content

भला मानस कोन।

💐🙏🏾*******************✍🏼💐
बड़ी बार सुनते है जी बड़ा भला मानस है! भला इंसान है! बड़ा अच्छा लगता हैं संबोधन करते हुए सुनते हुए। शाबास सी महसूस होती है। मन को अच्छा लगता है। एक आत्मीयता का एहसास होता है। भला मनुष्य आखिर है कोन? भला जो हमारी सहायता बिना जाने बिना लालच करे। भला वो जो मानवता को समझता हो। भला वो जिसे भलाई तो करनी है पर श्रेय की जरूरत नही। भला वो जो स्तिथि भांप के स्वयं से सहायता के लिए आगे आये। भला वो जो सही को जान कर सही के साथ रहे। भला वो जिसमे कपट न हो। भला वो जो न्याय समझता हो।भला वो जो बैर को प्रेम से निभाना जनता हो। भला वो जो अत्यधिक सहनशील हो।भला वो जो क्रोध को काबू करने की क्षमता रखता हो। भला वो सकरात्मक सोच रखता हो। भला वो जो सदा परोपकार के लिये तैयार रहता हो। भला वो जो परिवार के मायने समझता हो। भला वो जो बच्चों में बच्चों सा दिल लिए हो। भला वो इंसान में ही ईश्वर के दर्शन ढूंढता हो। भला वो जो सद्कर्म में विश्वास रखता हो सद्कर्म ही करता हो। भला वो प्रकृति के सब रूपों को समान रूप से प्यार करता हो। भला वो मन की समझता हो मन से करता हो।भला वो जो घोर आपदा में भी निभाना जनता हो। भला वो जो समाज में सामंजस्य स्थापित करने के लिए सदा तत्तपर रहता हो। भले के फेरिस्त उतनी ही लंबी है जितनी एक इंसान के भलमनसी की दूसरे से उम्मीद।मनुष्य में भला होने बनने के सारे गुण मौजूद है। और ये हर किसी मनुष्य में बराबर रूप से मौजूद है। मगर हम अपने इच्छाओं लालच द्वेष अहम डर के वश इससे दूर भागते है। भला इंसान कोई भी हो सकता है पर आज कल ये बहुत मुश्किल से ही मिलते है। हमारी महत्वकांक्षी प्रवृति ने हमारे अंदर मौजूद भले मानस को कहीं अंधेरों में छुपा दिया है जो शायद अब मतलब के समय ही बाहर आता है। संसार में अगर आज भी विश्वास जिंदा है तो कुछ भले मानसों की वजह से ही जिंदा है। एक स्वच्छ उत्तम  समाज के लिए भले मानसों की बड़ी जरूरत है। कुछ तलाशिये अपने अंधेरों में छुपे अपने भोले भले पन को शायद कोई किसी जगह आप के इंतज़ार में किसी रोशनी की तलाश में हो। हर इंसान में एक ही ईश्वर प्रभु की लो जल रही है।इससे एकाकार भले की सबसे बड़ी पहचान है।
जय हिंद।
****🙏🏾****✍🏼
शुभ रात्रि।
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

Comments

Popular posts from this blog

अहंकार - भाग ३ 🌹🙏

🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है।  हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है।  मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा  मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है।   आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...

भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ।

🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए  स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम  से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए  ...

और मुस्कुराना तो है ही।

💐क्या कहें किससे कहें।सब तरफ अपने आप से सब मशगूल हैं ।सब इस तरह की हम कमोबेश काम से ही नज़र आतें है। दौड़ती है जिंदगी कुछ इस रफ्तार से के हम पीछे से छूटे जाते है। कहें दिल की किसस...