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कभी कभी मन हंसता रहता है हम चाहे न चाहे खुशी अपने आप आती है। बिना कारण।और मन प्रफुलित हो खूब खिलखिलाता है।कारण मुझे बड़ा सादा सा लगा ।जब दिमाग शांत हो कोई बोझ न हो और आस पास हल्का फुल्का माहौल हो।तो शायद दिमाग कि स्तिथि बहुत सामान्य हो जाती है।जब दिमाग सामान्य स्तिथि में पहुंचता है तो मान लीजीये ये इसकी सबसे सौहार्द की स्तिथि है।हर तरफ सब अच्छा अच्छा महसूस होता है। जो हल्की फुल्की बातें हमारे चारों तरफ होती है वो भी मनोरंजक सी लगती है।अगर आस पास दोस्त मित्र मिल जाते है तो समाँ बांध देते है।हम उम्र की बातें तफरी का मूड बना देती है।मित्रों सहयोगियों सेहकर्मियों के साथ खाने की टेबल छप्पन भोग सी महसूस होती है ।सारे डिब्बे खुल जाते है।कई स्वाद ज़ुबान पे चढ़ जाते है।इन सब के बीच दिमाग पूरे मजे ले रहा है।जब आप हंसते हो।खून का दौरा अपनी प्राकृतिक चाल पकड़ लेता है।जीवन वायु को मस्तिष्क तक खूब इकठ्ठी कर ले जाता है।हृदय हसने के साथ ही अपनी कसरत शुरू कर देता है।कसरत करता हृदय बेहद स्वस्थ और तारो ताज़ा महसूस करता है।दिमाग को सकारत्मक संदेश भेजने लगता है।हर हंसी का पल पूरा आप का बन जाता है।सारे गम कुछ समय के लिये कहीं वक़्त की काल कोठरी में कैद हो जाते है।और शरीर हल्का हो जाता है।रक्तचाप नियंत्रित हो सही महसूस करवाता है। आस पास के अच्छे वातावरण का सुखद एहसास हमारे दिमाग रूपी मन को खुश करता है।प्रफुलित करता है। ये छोटी छोटी सी फैली खुशियां इसके बोझ को कुछ समय के लिए हटा देती हैं।ये हटा बोझ हमे आनंद की शीतलता में ले जाता है।हमे रोमांच महसूस होता है। ये रोमांच जब तक बना रहता है जब तक कोई असहज स्तिथि न उतपन्न हो जाये।दूसरा ये प्रसन्नता की स्तिथि आप के अपनो की खुशी की गवाह भी है।आप के अपने प्रसन्न मुद्रा में हों तो आप का प्रसन्न रहना तेह है।और जब आप प्रसन्न है तो अनावश्यक बातों पे ध्यान नही जाता।और जब ऐसी बातों भाग भिगंवाओं से आप दूर रहते हो तो दिमाग नकरात्मक स्तिथि के एहसास को नही पकड़ता । शांत रहता है।ये शांत स्तिथि ही प्रसन्न मुद्रा है।ये प्रसन्न मुद्रा सारे बोझों को दूर रखे है।ये दूरी जब तक बनी है आप प्रसन्नता के शीतल के आगोश में है।ये शीतलता तन मन को खिला के रखे है।ये खिला खिला मन ही आप के प्रसन्नचित होने और रहने का कारण है।इसे बनाये रखने का भरकस प्रयत्न करें।जहां तहां मौका मिले खुशी के छल्ले बिखेरते रहे और बिखेरते चलें।खुद भी खुश और आस पास का माहौल भी सहज।आप खुश अपने भी खुश।अपने खुश तो दर्द दुख कहाँ। खुश बने राहिये और सब को खुश रखिये।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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