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मंत्रमुग्ध हूँ जीवन मैं बसे रस रंगों से।
हर तरफ बहार ही नज़र आती है।।
मन इसके रसों का सदैव पान करता है।
शरीर इसके इंद्रधनुष से सजा रहता है।।
बहुत से रिश्तों के रस का स्वाद रोज लेता हूँ।
रिश्तों के रंगों से सदा सरोबार सदा रहता हूँ।।
पत्नी से जीवन रस सब रसों से रसीला।
पत्नी का हृदय साथ सब रंगों से रंगीला।।
बच्चों से जीवन रस चासनी से भी गाढ़ा मीठा।
बच्चों के होने से जीवन रंग भी गाढ़े चटकीले।।
माता पिता ने किया हममें जीवन रस संचार।
माता पिता ने बनाया प्रेम रंग संग जीवन संसार।।
दोस्तों ने घोली इस मे खुशबू रस अदद बहार।
दोस्तों ने दी दुनिया मे होली सी रंग बहार ।।
क्या रिश्ते क्या नाते सब रसों के भरे प्याले।
मुझमें भर देते न जाने कितने रंग हरदम निराले।।
हां में जी रहा हूँ इन्हें कहीं रूह की गहराइयों से।
मुझमें जितने जीवन रस रंग है बने महके इन्ही गहराइयों में।।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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