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इंसान के जीवन मे पहली बार आंख खुलने के साथ प्यारा रुदन होता है।सारे अंग अँगड़ाइयाँ मारने लगते है।चारों तरफ खुशी का माहौल बन जाता है।सब के सब जश्न में डूब जाते है।सामाजिक बुराइयों को अलग रखते हुए कह रहा हूँ।घर मे नए जीवन का उत्सव मनता है।हम पंजाबी है तो रौनक खूब लगती है।जोर शोर से जश्न होता है।मिठाइयों की बहार आ जाती है।सब कोई नवजात की भीनी भीनी महक लेना चाहते है। अच्छे मंजर की बात कर रहा हूँ। जब तक नावजात से अबोध की दुनिया रहती है सब से प्यारा समय होता है।कोई बुराई दिल मे घर नही करती।हर कोई अपना सा प्यार लिए नज़र आता है।फिर बोध की स्थिति आती है।आप के खास दिन का जश्न हर साल मनाया जाता है।पहले पहले माता पिता अपनी सहूलियत हिसाब से आप के साथ ये खुशियों के पल याद कर जश्न मनाते है।शायद कुछ तुम्हारे हमारे पहले दिन के ख्याल भी आते है। और फिर एक यात्रा शुरू होती है जहां बालक की इच्छाएँ हावी होती है।अपनी समृद्धि की स्तिथि अनुसार जिद को पूरी करने का पालन किया जाता है।वक़्त के साथ रस्मे रिवाज और मुबारक बदलती जाती है।पहले पहल पूजा स्थल के दर्शन कर ईश्वर का आशीर्वाद ले दान पुण्य से दिन की शुरुआत होती थी।देने के सुख को समझाया जाता था।नये कपड़े मिलते थे।फिर माँ हलवा पूरी पकोड़े न जाने क्या क्या मन की पसंद की चीज खाने को बनाती खिलाती जाती थी।माँ की बचपन की खुशबू सारी उम्र का अटूट रिश्ता प्रेम से निभाती है।जो आज भी सतत जारी है। फिर वक़्त बदला केक का जमाना आ गया।फिर चिप्स केक पेटिस और एक तोहफे ने उम्मीद को लालच में बदल दिया।माँ तो हर रूप में।प्यार ही देती आयी मैंने तो अधिकार मान लिया।उम्र लगी समझने में।मगर एक बात हर वक़्त बेहतर रही ये दिन कभी माँ ने उदासी भरा नही होने दिया।जश्न तो दुनिया मे आने पे मना था और फिर ये आनंद की किर्या अनवर्त आज तक जारी है।सब दोस्त मित्र सखा बंधु बांधव रिश्तेदार नातेदार जानकार आज तो बधाई दे ही देते है।और हम तहे दिल से शुक्रिया करते हुऐ मन से कबूल करते हुए आप सब को बहुत सा शुक्रिया देते है। और मन से कहते है आज तो दिन बना दिया भाई सब ने।धन्यवाद।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि। गुड नाईट । शब्बाखैर।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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