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मैं बहुत से कर्जो में डूबा हूँ।
जिधर देखता हूँ कहीं न कहीं किसी का ऋणी हूँ। इस खूबसूरत संसार मे आने के लिए मातृऋण से ऋणी हूँ।इस संसार के सुखों का बोध कराने के लिये पितृऋण से ऋणी हूँ।समस्त शिक्षा ज्ञान के लिए गुरु का ऋणी हूँ।युवा अवस्था मे जीवन रंग भरने के लिये अर्धांगिनी स्वामिनी धर्मपत्नी प्रेमिका से विवाह देहसुख से ऋणी हूँ।जीवन अंकुर डालने के लिये संतान से ऋणी हूँ।सामाजिक व्यवस्था में स्थान देने के लिये समाज का ऋणी हूँ।ईश्वरीय मार्ग पे भक्ति देने के लिए ईश्वर और उसकी ईश्वरीय सत्ता का ऋणी हूँ।संतान सुख के लिये कर्मो का ऋणी हूँ।भूख खत्म करने के लिये अनाज का ऋणी हूँ।शुद्ध हवा वायु के लिए प्रकृति का ऋणी हूँ।शुद्ध साफ जल सेवन से नदियो का ऋणी हूँ। ये ऋण न जाने अनजाने कितनो का मुझ पे है और कितने है।में हर वक़्त हर लम्हा किसी न किसी ऋण से ऋणी हूँ।मेरी इतनी औकात कहाँ जो इसे लौटा सकूं।बस इतनी मुझमें हे ईश्वर शक्ति भक्ति पवित्रत दे के बस मैं केवल इन्हें सहेज के बस ब्याज ही लौटाने में सक्षम हो सकूं।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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