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अरे बल कहाँ छिपा है इसे मैं ढूंढ़ रहा हूँ।
अरे बल भुजाओं में है वजन उठा रहा हूँ।।
अरे बल टांगो में है लंबा दौड़ रहा हूं।
अरे बल कपाल में है कुछ खेल रहा हूँ।।
अरे बल पैरों में है लंबी बॉल फेंक रहा हूँ।
अरे बल कमर में हैं हर और लचका रहा हूँ।।
अरे बल सीने में है वार से दिल बचा रहा हूँ।
अरे बल रीड में है सो झुक नही रहा हूँ।।
अरे बल मांसपेशियों में है समझा रहा हूँ।
अरे बल धड़कते दिल मे है बता रहा हूँ।।
अरे जाने कितने बलों के साथ जी रहा हूं।
अरे ये एक और बल आया मित्र लाया।
अरे देखो बल मेरी अभिभावकों से आया।।
अरे बल तो मुझे मेरे ज्ञान से भी मिला है।
अरे बल तन से मन सब जगह मिला है।।
अरे सब बलों की संस्था बसी कहाँ है।
अरे असल ये बल तो बुद्धि से मिले है।।
अरे हम ऐसे ही बलों के पीछे क्यों भागे है।
अरे बुद्धि विकसित की तो सब बल उल्टा इसके पीछे भागे है।।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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