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अरे बल कहाँ छिपा है इसे मैं ढूंढ़ रहा हूँ।
अरे बल भुजाओं में है वजन उठा रहा हूँ।।
अरे बल टांगो में है लंबा दौड़ रहा हूं।
अरे बल कपाल में है कुछ खेल रहा हूँ।।
अरे बल पैरों में है लंबी बॉल फेंक रहा हूँ।
अरे बल कमर में हैं हर और लचका रहा हूँ।।
अरे बल सीने में है वार से दिल बचा रहा हूँ।
अरे बल रीड में है सो झुक नही रहा हूँ।।
अरे बल मांसपेशियों में है समझा रहा हूँ।
अरे बल धड़कते दिल मे है बता रहा हूँ।।
अरे जाने कितने बलों के साथ जी रहा हूं।
अरे ये एक और बल आया मित्र लाया।
अरे देखो बल मेरी अभिभावकों से आया।।
अरे बल तो मुझे मेरे ज्ञान से भी मिला है।
अरे बल तन से मन सब जगह मिला है।।
अरे सब बलों की संस्था बसी कहाँ है।
अरे असल ये बल तो बुद्धि से मिले है।।
अरे हम ऐसे ही बलों के पीछे क्यों भागे है।
अरे बुद्धि विकसित की तो सब बल उल्टा इसके पीछे भागे है।।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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💐क्या कहें किससे कहें।सब तरफ अपने आप से सब मशगूल हैं ।सब इस तरह की हम कमोबेश काम से ही नज़र आतें है। दौड़ती है जिंदगी कुछ इस रफ्तार से के हम पीछे से छूटे जाते है। कहें दिल की किसस...
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