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तमाशा देखो दुनिया का ये दुनिया पूरी फरेबी बनी हुई है।
तमाशा देखो कुछ दोस्तों का ये बेहद मतलबी से हो गये है।।
तमाशा देखो कुछ अपनो का ये ईर्षा से पटे हुए है।
तमाशा देखो उस संतरी का जिसके रहते सब तरफ चोर लगे हुए है।।
तमाशा देखो आफिस में सहकर्मियों का बस टांग खींचने में ही लगे हुए है।
तमाशा देखो दुकानदार का आज ही सब लूटने का ख्याल लिए है।।
तमाशा देखो राजनेता का झूठ पे झूठ बोलने पे जोर शोर से लगे हुए है।
तमाशा देखो सरकारी बाबू का जेब लूट खसोट से भरने लगे हुए है।।
तमाशा देखो मंत्री का लाल बघी के लिए ही जैसे बस पैदा हुए है।
तमाशा देखो आज की फ़िल्मी अप्सराओं का उतारने के होड़ लगी हुई है।।
तमाशा देखो मी टू का आज कल तो सबकी वाट जोर शोर से लगी हुई है।
तमाशा देखो समाचार चैनलों का झूठ बकने की शर्त लगी हुई है।।
तमाशा देखो राजनीतिक भिखारियों का चंदा मांगने की होड़ लगी हुई है।
तमाशा देखो लखनऊ के नवाब का पीक फेकने की लगी हुई है।।
तमाशा देखो योगियों का भोग की सबसे ज्यादा लगी हुई है।
तमाशा देखो पत्रकारों का सब पे कालिख मल अपने चमकाने की लगी हुई है।।
तमाशा देखो पंडित का हर कुंडली अड़चन देने में लगी हुई है।
तमाशा देखो हरिजनों का बस नीचा रहने में ही भलाई नज़र आने लगी है।।
बहुत तमाशे है दुनिया मे देखने केे भाई जहां दिखे मजे लिए जाओ।
ख्याल रहे दुनिया बहुत खराब कल कहीं तुम ही तमाशा न बन जाओ।।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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