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ये बंदिशें है बहुत तुम से नज़र मिला ना पायेंगे।
अगर सामने आ भी जाओ एक नज़र देख न पायेंगे।।
चाहते है बहुत के बहुत तुम मेरी नज़रों में बसों।
चाह के भी यू तुमको अपनी नज़र में बसा न पायेंगे।।
तेरे चहेरे की एक नज़र पे हम ये दिल भर लेते है।
पता है के तुमको चाह के भी तमाम उम्र हम न पायेंगे।।
सोच के तुमको कुछ तो दिल से दिल बहला लेते है ।
मायूस हुए भी तो यादों से तुम्हारी दिल बहला लेते है।।
आज कुछ शिकवे भी अगर थे तो उनको भी हमने दूर किया।
अमानत ही नही अपनी तो दिल हमने भी तोड़ लिया।।
मुकद्दर में अगर तेरा इकरार लिखा होता कही।
तो हम भी तुझे जी भर जी लेते अपने मे कहीं।।
मगर मेरी किस्मत ही रही कुछ खफा सी खलिश ऐसी।
हम सोचते ही रहे और तुम मीलों दूर हुए कहीं।।
अब क्या रहा तेरी बेखबर याद के सिवा हम पे ओ जाने जाँ।
याद कर दम भर तुझे अपनी साँसों में जी लेते है।।
सामने ये बंदिशें है बहुत तुम से नज़र मिला ना पायेंगे।
कहीं अगर सामने आ भी जाओ देख न पायेंगे कभी।।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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