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कभी कभी मैं खुद से भी खफा होता हूँ।
हाँ मैं खुद से खफा होता हूँ और बहुत खफा होता हूँ।
कुछ गलत करूँ तो खुद से खफा होता हूं।
कुछ गलत सोचु तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत विचारूं तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत कह दूं तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत मन मे धारूँ तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत लिख दूं तो खुद से खफा होता हूं।
कुछ गलत मान लूं तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत निर्णय दे दूं तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत होता देख लूं तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ किसी के दिल को ठेस पहुंचाऊं खुद से खफा होता हूँ।
कुछ किसी के सम्मान को आहत करूँ खुद से खफा होता हूँ।
कुछ अपनी नाकामियों से मैं खुद से खफा होता हूँ।
कुछ नकल की आदत से मैं खुद से खफा होता हूँ।
कुछ असफलताओं पे में खुद से खफा होता हूँ।
हाँ मैं खुद से खफा होता हूँ और बहुत खफा होता हूँ।
जा जाने कितनी बुराइयां है मेरी जिनसे मैं खुद से खफा होता हूँ।
हर बार येही कोशिश रहती है के इस बार खफा न होऊं।
मगर हर बार मैं खुद से खफा होता हूँ और बहुत खफा होता हूँ।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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