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कभी कभी मैं खुद से भी खफा होता हूँ।
हाँ मैं खुद से खफा होता हूँ और बहुत खफा होता हूँ।
कुछ गलत करूँ तो खुद से खफा होता हूं।
कुछ गलत सोचु तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत विचारूं तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत कह दूं तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत मन मे धारूँ तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत लिख दूं तो खुद से खफा होता हूं।
कुछ गलत मान लूं तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत निर्णय दे दूं तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ गलत होता देख लूं तो खुद से खफा होता हूँ।
कुछ किसी के दिल को ठेस पहुंचाऊं खुद से खफा होता हूँ।
कुछ किसी के सम्मान को आहत करूँ खुद से खफा होता हूँ।
कुछ अपनी नाकामियों से मैं खुद से खफा होता हूँ।
कुछ नकल की आदत से मैं खुद से खफा होता हूँ।
कुछ असफलताओं पे में खुद से खफा होता हूँ।
हाँ मैं खुद से खफा होता हूँ और बहुत खफा होता हूँ।
जा जाने कितनी बुराइयां है मेरी जिनसे मैं खुद से खफा होता हूँ।
हर बार येही कोशिश रहती है के इस बार खफा न होऊं।
मगर हर बार मैं खुद से खफा होता हूँ और बहुत खफा होता हूँ।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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💐क्या कहें किससे कहें।सब तरफ अपने आप से सब मशगूल हैं ।सब इस तरह की हम कमोबेश काम से ही नज़र आतें है। दौड़ती है जिंदगी कुछ इस रफ्तार से के हम पीछे से छूटे जाते है। कहें दिल की किसस...
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