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ये होश बहुत बदतमीज है कमबख्त गुमते खो जाते है।
जब भी किसी खूबसूरत बला को देखते खो जाते है।
जब भी कोई गलती से तारीफ कर दे खो जाते है।
जब कोई सफलता हाथ लगे बेचारे खोने लगते है।
जब भी कोई प्यार दे कमबख्त खोने को होते है।
जब कभी खुशियाँ अनायास बरस जाये ससुरे खो जाते है।
जब कभी तनहाइयों में कोई साथ मिल जाये खो जातेे है।
बीवी डांट जाये तो बस होश भागने को होते है।
बॉस से उलझ डांट खाये तो होश पैदल हो लेते है।
जीवन में पहला पुरस्कार मिलते ही खोने को होते है।
जैसे ही प्रसिद्धि हाथ लगती है जाने कहाँ घांस चरने चले जाते है।
फिर मंदिर के ढोल मंजीरे बजते है और ये फिर कही गुम हो जाते है।
जब कभी सुंदरता से मुलाकात होती है ये लंबे समय गुमें रहते है।
जब कभी उत्कृष्ट कार्य सम्पन्न होता है ये भागने को होते है।
बहुत से लम्हे है जहां इन्हें गुमने का बहुत शौक होता है।
फिर माँ का एक तमाचा आता है और अक्ल कमबख्त ठिकाने आ लगती है।
रही सही कसर पिता के सर्राटे दार थपड से पूरी होती है।
ऐसे में होश गुमना तो दूर अक्ल भी ठिकाने पे आ रहती है।
फिर भी कभी कभी ये होश बहुत बदतमीज है कमबख्त गुमते खो जाते है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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