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ये होश बहुत बदतमीज है कमबख्त गुमते खो जाते है।
जब भी किसी खूबसूरत बला को देखते खो जाते है।
जब भी कोई गलती से तारीफ कर दे खो जाते है।
जब कोई सफलता हाथ लगे बेचारे खोने लगते है।
जब भी कोई प्यार दे कमबख्त खोने को होते है।
जब कभी खुशियाँ अनायास बरस जाये ससुरे खो जाते है।
जब कभी तनहाइयों में कोई साथ मिल जाये खो जातेे है।
बीवी डांट जाये तो बस होश भागने को होते है।
बॉस से उलझ डांट खाये तो होश पैदल हो लेते है।
जीवन में पहला पुरस्कार मिलते ही खोने को होते है।
जैसे ही प्रसिद्धि हाथ लगती है जाने कहाँ घांस चरने चले जाते है।
फिर मंदिर के ढोल मंजीरे बजते है और ये फिर कही गुम हो जाते है।
जब कभी सुंदरता से मुलाकात होती है ये लंबे समय गुमें रहते है।
जब कभी उत्कृष्ट कार्य सम्पन्न होता है ये भागने को होते है।
बहुत से लम्हे है जहां इन्हें गुमने का बहुत शौक होता है।
फिर माँ का एक तमाचा आता है और अक्ल कमबख्त ठिकाने आ लगती है।
रही सही कसर पिता के सर्राटे दार थपड से पूरी होती है।
ऐसे में होश गुमना तो दूर अक्ल भी ठिकाने पे आ रहती है।
फिर भी कभी कभी ये होश बहुत बदतमीज है कमबख्त गुमते खो जाते है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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💐क्या कहें किससे कहें।सब तरफ अपने आप से सब मशगूल हैं ।सब इस तरह की हम कमोबेश काम से ही नज़र आतें है। दौड़ती है जिंदगी कुछ इस रफ्तार से के हम पीछे से छूटे जाते है। कहें दिल की किसस...
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