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मौजी मन।

🌹🙏🏼❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣✍🏼🌹
ये मन बड़ा मौजी है जहाँ देखो हसीन ख्वाब संजो लेता है।
मैं काबू में करने को होता हूँ ये फिर दूर भाग लेता है।
कभी इस डाल कभी उस डाल बस टिकाव नही लाता है।
मैं जंजीर डालने को होता हूँ ये ओझल होने लगता है।
इस पल खुश इस पल दुखी पता नही कब इसने किसी की सुनी।
यहां कुछ चाहने को होते है ये राह बदलने निकल पड़ता है।
अभी तो इसे गुस्सा था अरे अभी इसे प्यार आने को है।
न जाने कब इसका मूड बदलता लाख समझाने को है।
बेहिसाब प्रश्न उमड़ते जब उत्तर को होता नया प्रश्न खड़ा कर लेता।
मैं घुमा फिरा के ला इसे बैठाता ये फिर चलने को होता।
मैं इसे समझाने को होता ये मचल मचल जाता।
चंचल सी चिडया सा लगता कभी इस डाल कभी उस डाल फुदकता।
मैं सोचने लगता ये सोच में ही किधर कहीं और निकल जाता।
बहुत कोशिशें की इसे ज्ञान के रास्ते शांति की।
बस किसी को गुलाब देते ही फिर भटक जाता।
मैं इसे फिर घेर घार के बापिस लाता और ये पीछे दरवाजे बाहर हो लेता।
सोचा अब चल छोड़ो इसे क्या काबू करना मुझे कौन सा साधु बनना।
बस इतने में ये बहुत बहलता थोड़ा शांत नज़र आता।
फिर अचानक जोर से फुदकता नई डाल जा बैठता।
ये ही इसकी प्रवृत्ति है और में अबोध अज्ञानी बेअसर।
येही सोच सब छोड़ा इसपे बोला चल ले चल जिधर ले जाना तुझे।
अब न तेरी उड़ान को रोकू न तुझको टोकूं।
बस मन की तो सुन और मन की कर ले।
इतनी गफलतों के बाद इत्ता ही समझ आया इक तू ही तो है जो अपना है।
जय हिंद।
💫****🙏🏼****✍🏼
शुभ रात्रि।
🌹🌹🌹🌹🌹❣🌹🌹🌹🌹🌹

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