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तेरी रहमतों ने न जाने कितने ख्वाब मेरे बना दिये।
मैं शुक्रगुजार हूं तेरा जज़्बात तूने मुझमें जगा दिये।
काबिल तो नही मैं किसी के ख्वाब पूरे कर सकूं।
न रहे कोई ख्वाब अधूरा तूने जरिये इतने बना दिये।
हम तेरी पनाहों की नज़र अपने को महफूज़ देखते है।
वरना ख्वाब टूटने को कौंन सी देर लगती है यहाँ।
याचनायें बहुत सी पाली होंगी हमने भीतर शायद।
तू कब इन्हें सुनता रहा हम लेते रहे कभी पता न चला।
निगाहें तेरी हम पे भी पड़ती रही हम समझ न सके।
तुझे तेरे रूप को कभी खुली आंखों से देख न सके।
जब भी खुशियां आती धन्यवाद तो तेरा ही होता।
आंखें जब भी बंद करते बस तुझे और तेरी रहमतें पाते।
याद शायद बहुत बार मैं भूला होऊंगा पर तुन्हें अबोध ही जाना।
मैं गलतियां भी करता रहा तूने बालक ही जाना।
बस एक खता और करनी है मुझको माफी पहले ही दे दो।
बस कुछ भी हो अपनी पनाहों में मुझे जरा सी जगह सदा के लिए दे दो।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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