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तेरी रहमतों ने न जाने कितने ख्वाब मेरे बना दिये।
मैं शुक्रगुजार हूं तेरा जज़्बात तूने मुझमें जगा दिये।
काबिल तो नही मैं किसी के ख्वाब पूरे कर सकूं।
न रहे कोई ख्वाब अधूरा तूने जरिये इतने बना दिये।
हम तेरी पनाहों की नज़र अपने को महफूज़ देखते है।
वरना ख्वाब टूटने को कौंन सी देर लगती है यहाँ।
याचनायें बहुत सी पाली होंगी हमने भीतर शायद।
तू कब इन्हें सुनता रहा हम लेते रहे कभी पता न चला।
निगाहें तेरी हम पे भी पड़ती रही हम समझ न सके।
तुझे तेरे रूप को कभी खुली आंखों से देख न सके।
जब भी खुशियां आती धन्यवाद तो तेरा ही होता।
आंखें जब भी बंद करते बस तुझे और तेरी रहमतें पाते।
याद शायद बहुत बार मैं भूला होऊंगा पर तुन्हें अबोध ही जाना।
मैं गलतियां भी करता रहा तूने बालक ही जाना।
बस एक खता और करनी है मुझको माफी पहले ही दे दो।
बस कुछ भी हो अपनी पनाहों में मुझे जरा सी जगह सदा के लिए दे दो।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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💐क्या कहें किससे कहें।सब तरफ अपने आप से सब मशगूल हैं ।सब इस तरह की हम कमोबेश काम से ही नज़र आतें है। दौड़ती है जिंदगी कुछ इस रफ्तार से के हम पीछे से छूटे जाते है। कहें दिल की किसस...
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