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आज कल सेल्फी लेने का जबरदस्त दौर है।
जिसे देखो जिधर देखो सेल्फी ले रहा है।
कोई मोटर साईकल चलाते कोई कार में।
कोई स्टाइल लेने के लिये सेल्फी ले रहा है।
खूब ठंड हो रही है और शादियों की महफिलें सजी है।
कैमरे भी चालू है परवाह किसको पड़ी है।
एक दौर था फोटू खिंचवाने को लाइन लगती थी।
दस्तक की गवाह फोटू ही बस होती थी।
एल्बम बनती थी कई दिन देखी जाती थी।
क्या दौर आया है इनकी जैसे विदाई सी हो गयी है।
हर एक यहां अपनी सेल्फी अपने अंदाज में ले रहा है।
कुछ तो सर्दी में भी मौसम जरा गर्म मौसम का लुत्फ ले रहे है।
तरह तरह के पोज़ बनाके सब सेल्फी ले रहे है।
क्या बच्चे क्या जवान क्या अधेड़ क्या बूढ़े सब सेल्फी के क्रेजी लग रहे है।
दूल्हा दुल्हन अपनी मौज बाकी सब अपनी मौज ले रहे है।
ये तो शादी की बात थी आज कल तो हर पल सेल्फी हो रहा है।
जहां तहां फेसबुक इंस्टा पे लोड हो रहा है।
लोग लाइको को लाइन लगा रहे है।
वो अलग बात है औरतों को ज्यादा मर्दो को कम आ रहे है।
सेल्फी के लिए लोग बेहद क्रेजी हो रहे है।
हर खतरा अपना जीवन दाव पर लगा मोल ले रहे है।
कोई पुल पे कोई पटरी पे जिंदगी के खतरों से खेल रहे है।
सेल्फी का जबरदस्त क्रेज है भाई सब लुत्फ ले रहे है।
हर पल कैमरे में कैद कर रहे है कल हो न हो ये समझ रहे है।
कुछ यादें सदा ले लिये किसी कोने में लोड कर रहे है।
जब मन आये तब आप पाएं ऐसी व्यवस्था अपने लिए कर रहे है।
आज कल सेल्फी का जबरदस्त दौर है।
जिसे देखो जिधर देखो सेल्फी ले रहा हैं।
आप भी लीजिये लीजिये भाई..
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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