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कवि मन क्या कहता है?
कवि मन भाव गढ़ता है।
कवि मन सच बोलता है।
कवि मन दिल खोलता है।
कवि मन दर्पण देता है।
कवि मन तर्पण करता है।
कवि मन व्यंग करता है।
कवि हर रस दर्शन देता है।
कवि मन मस्त रहता है।
कवि मन मलंग बनता है।
कवि मन खोजता जाता है।
कवि मन मन पड़ता रहता है।
कवि मन समुंदर को कुंजल में लेता है।
कवि मन शब्द बांधता है।
कवि मन वाणी में रस देता है।
कवि मन खेल खेलता है।
कवि मन दिमाग पकड़ता है।
कवि मन एकाग्र होता है।
कवि मन व्यग्र होता है।
कवि मन चेतन रहता है।
कवि मन विवेचन करता है।
कवि मन काल देखता है।
कवि मन इतिहास गढ़ता है।
कवि मन चंचल होता है।
कवि मन मोह लेता है।
कवि मन सकून में रहता है।
कवि मन निश्छल होता है।
कवि मन सीधा होता है।
कवि मन शन्ति दूत होता है।
कवि मन भाषा सिंचित है।
कवि मन दिशा बताता है।
कवि मन दृश्य बनाता है।
कवि मन आत्मविभोर करता है।
क्या बताऊँ कवि मन क्या होता है?
कवि मन क्या कहता है?
जरा सुनते जाईये कवि मन काल दिशा देश संदेश देता है।
जो आज है उसकी सुनाता है।
फिर पूछते हो कवि मन क्या कहता है?
बताऊ न बताऊ समझ गए कवि मन सबमे रहता है।
कुछ न कुछ हमेशा सच भाव संग कहता है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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