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बहुत बेपरवाह हुए अपनी मुसीबतों से।
बहुत बेपरवाह हुए अपने दुखों से।
बहुत बेपरवाह हुए अपनी सफलताओं से।
बहुत बेपरवाह हुए अपनी मुहब्बतों से।
बहूत बेपरवाह हुए जिंदगी की रुसवाइयों से।
बहुत बेपरवाह हुए बरसते सुखों से।
बहुत बेपरवाह हुए मन की बेचैनियों से।
बहुत बेपरवाह हुए तन्हाइयों से।
बहुत बेपरवाह हुए गुरबातों के दिनों से।
बहुत बेपरवाह हुए जीवन की लाचारियों से।
बेपरवाह हुए अपनो से मिली बेपरवाही से।
सकून तो हमने भी ढूंढे इन बेपरवाहियों में।
बस बेपरवाह न हुए अपनो के लिए कभी।
बस बेपरवाह न हुए छूटते अपने रिश्तों से कभी।
बस बेपरवाह न हुए अपनी मिली असफलताओं से कभी।
बस बेपरवाह न हुए अपनी नाकामियों से कभी।
बस बेपरवाह न हुए उनके आंसुओं से कभी।
बस बेपरवाह न हुए अपनो की जिम्मेवारी से कभी।
जिंदगी का असल फसाना रोज लिख रहे हैं।
बेपरवाह हर फालतू दूर जाते मसलों से हो रहे है।
परवाह हर अपने की कर रहे है जो रोज मुझसे निभा रहे है।
इन परवाहियों से शायद अपनी असल जिंदगी तलाश रहे है।
कुछ फालतू उलझन सी बस परवाहियों को छोड़ सकूं बापिस ला रहे है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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