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तेरे चेहरे पे खुशी देख कर दिल झूम झूम जाता है।
तेरे पास आने से मजा भी तो ज्यादा हो जाता है।
तेरे चेहरे की रंगों रंगत और भी हसीन हो जाती है।
हम देखते देखते और बस तुझे देखते रह जाते है।
तू छमछम से चली आती है हम झूम झूम जाते है।
तेरे चेहरे पे खुशी देख कर दिल झूम झूम जाता है।
क्या मुक़दस वक़्त होता है जो तेरा आना होता है।
हर और छाया नूर और बिखरा तेरासरूर होता है।
तेरे पैरों की मदभरी आहट से मन यूँ गूंज जाता है।
दिल के तार छिड़ जाते है मन गाने लग जाता है।
तुम में डूब के यूँ कुछ दिल का करार आ जाता है।
सारी ख्वाईशें तेरी इक अदद नज़र ही मोहताज़ है।
हमपे जब डलती है तो हमारी भी कीमत होती है।
तेरे होने से हम है इसकी भी वजह बस तू होती है।
कभी नाराज़ होते भी है के दूरी बर्दाश्त नही होती।
ये गुलिस्तां तेरी महक से है वरना रात नही होती।
तेरे चेहरे पे खुशी देख कर दिल झूम झूम जाता है।
मेरा सारा जहां तेरे होनेभर से आबाद हो जाता है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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