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ये मुल्क किस और जा रहा है।
नफरतों का दौर आ रहा है।
हर कोई बेमतलब क्रोधित है।
न सुन रहा न समझ रहा है।
एक आक्रोश सा भरा हुआ है।
हर किसी के हिस्से नफ़रतें है।
कुछ अपनो से कुछ पड़ोस से है।
हर पल दुश्मनी पाल रहा है।
हर रोज़ दीवार और बड़ी कर रहा है।
बहकावे का खेल जोरो पर बना है।
बहकाने वाले ही तमाशबीन है यहाँ।
आग लगा के मजा ले रहे है।
नफरतों में तो हम जल रहे है।
हर पल आग लगा सुलगा रहे है।
मौका लगते ही घी डाल रहे है।
देशद्रोह नफरत से समझा रहे है।
आग उगलकर शांति ला रहे है।
चालाक बहुत खुश खुश हो रहे है।
कुछ के तो वोट जोर से आ रहे है।
भड़के क्रोध ने बुद्धि को हर लिया है।
हर और क्रोध ही दिखाई दे रहा है।
अफवाहों का बाजार भी बहुत गर्म है।
लांछन लगाने में कोई भी कम नही है।
एक ही मिट्टी के सपूत ये खून प्यासे है।
भाई से भाई लड़ने लड़ाने को जान प्यासे है।
नफरतों का दौर है सिर चढ़ के बोल रहा है।
कुछ कहने से पहले बिना सुने ठोक रहा है।
आंखों में नफरत दिल मे बदला भरा है।
नफरतो का दौर है इंसान जल उठा है।
पैसे ने बुद्धि विवेक रिश्ते सब हर लिए है।
बच्चे से बूढे तक सब शीतल मन हर लिए है।
खराब सेहत ने दिमाग भी बस ठस दिये है।
मै आज बहुत व्यथित हो किंचित सोच रहा हूँ।
ये मुल्क किस और दिशाहीन बढ़ा जा रहा है।
नफरतों का दौर हमारी और चला आ रहा है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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