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ये मुल्क किस और जा रहा है।
नफरतों का दौर आ रहा है।
हर कोई बेमतलब क्रोधित है।
न सुन रहा न समझ रहा है।
एक आक्रोश सा भरा हुआ है।
हर किसी के हिस्से नफ़रतें है।
कुछ अपनो से कुछ पड़ोस से है।
हर पल दुश्मनी पाल रहा है।
हर रोज़ दीवार और बड़ी कर रहा है।
बहकावे का खेल जोरो पर बना है।
बहकाने वाले ही तमाशबीन है यहाँ।
आग लगा के मजा ले रहे है।
नफरतों में तो हम जल रहे है।
हर पल आग लगा सुलगा रहे है।
मौका लगते ही घी डाल रहे है।
देशद्रोह नफरत से समझा रहे है।
आग उगलकर शांति ला रहे है।
चालाक बहुत खुश खुश हो रहे है।
कुछ के तो वोट जोर से आ रहे है।
भड़के क्रोध ने बुद्धि को हर लिया है।
हर और क्रोध ही दिखाई दे रहा है।
अफवाहों का बाजार भी बहुत गर्म है।
लांछन लगाने में कोई भी कम नही है।
एक ही मिट्टी के सपूत ये खून प्यासे है।
भाई से भाई लड़ने लड़ाने को जान प्यासे है।
नफरतों का दौर है सिर चढ़ के बोल रहा है।
कुछ कहने से पहले बिना सुने ठोक रहा है।
आंखों में नफरत दिल मे बदला भरा है।
नफरतो का दौर है इंसान जल उठा है।
पैसे ने बुद्धि विवेक रिश्ते सब हर लिए है।
बच्चे से बूढे तक सब शीतल मन हर लिए है।
खराब सेहत ने दिमाग भी बस ठस दिये है।
मै आज बहुत व्यथित हो किंचित सोच रहा हूँ।
ये मुल्क किस और दिशाहीन बढ़ा जा रहा है।
नफरतों का दौर हमारी और चला आ रहा है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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💐क्या कहें किससे कहें।सब तरफ अपने आप से सब मशगूल हैं ।सब इस तरह की हम कमोबेश काम से ही नज़र आतें है। दौड़ती है जिंदगी कुछ इस रफ्तार से के हम पीछे से छूटे जाते है। कहें दिल की किसस...
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