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आज कल लोग बहुत नामाकूल हो गये है।
कमबख्त आहे बगाहे धमकाते नज़र आते है।
जिसे देखो चौधराहट चढ़ी नज़र आती है।
सिर्फ अपनी बात ही सही नज़र आती है।
अबे ओ नामकूलो बीवी पे ये दिखाओ तो जरा।
छट्टी का दूध न याद आ जाये तो बताओ जरा।
रात छोड़ दिन भी काला न हो जाये तो बताओ जरा।
तुम्हारी दाल सूप न बन जाये बताओ तो जरा।
चाय का भी मूत न हो जाये समझाना तो जरा।
जलीं रोटियों का स्वाद मजा भी बताना तो जरा।
बिना इस्त्री के वस्त्र का आनंद लेना तो जरा।
एक शब्द बोलो उसके के हज़ार सुनना तो जरा।
सोमरस का जूस कैसे बनता है देखना तो जरा।
बिना पिये नशा कैसे चढ़ता है समझना तो जरा।
न समझ आये तो बीवी से पंगा दुबारा लेना तो जरा।
फसबुकिये दबंग बनते हो फालतू बाते बनाते हो जरा।
इसलिए आज कल लोग बहुत नामाकूल हो गये है।
कमबख्त आहे बगाहे धमकाते नज़र आते है।
जिसे देखो चौधराहट चढ़ी नज़र आती है।
सिर्फ अपनी बात ही सही नज़र आती है।
न समझ आया तो कोई बात नही तो जरा।
बस मेरे ये शब्द भाभी जी को सुना देना तो जरा।
इसलिए कहता हूँ पहले घरवाली से निपटो फिर मेरे पास आना तो जरा।
पता है न निपटो गे न........समझ गये न जरा।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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