🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹
मजे की बात है हर घर सास बहु का राज है।
दोनों में वर्चस्व की लड़ाई सदियों से लगी हुई है।
दोनों को भी एक नौकरी पक्की मिली हुई है।
सुबह शाम एक दूसरे के खिलाफ स्कीम बनी हुई है।
दोनों के दिमाग की चकरी सदा चलायमान हुई है।
एक अपने तजुर्बे को हथियार बनाये हुए है।
दूजी अपने अधिकार की रक्षा हेतु हथियार उठाये हुए है।
दोनों के तरकश में कई अस्त्र शक्ति रूप समाये हुए है।
दोनों के पास एक ब्रह्मास्त्र भी सुरक्षित रखे हुए है।
दोनों और से शक्तियां रोज छूटती है और लड़ कर अलोप हो जाती है।
ये देख सास बहु एक दूसरे के गुणगान करती पायी जाती है।
मौका छूट न जाये इसलिए टोह भी लेती जाती है।
समय असमय जब मौका लगे शक्तियाँ एक दूसरे पे छोड़ दो जाती है।
हद तो ये है दोनों सीमाएं सुरक्षित रखने को हर पल ततपर पायी जातीं है।
जिसे मौका लगे मिसाइल अटैक करता है दूसरा भी पेट्रियाटिक छोढ़ता है।
युद्ध कभी भी कहीं भी छिड़ सकता है मौका तलाशा हर वक़्त जाता है।
दोनों की सीमाओं पे एक शख्स सफेद फ्लैग लिए खड़ा रहता है।
कुछ भी हो दोनों अपने युद्ध को यही रोक देती है।
इंतज़ार होता है ये इधर उधर हो तो लंका भेद दी जाये।
मजबूर प्रहरी सदा दोनों और नज़र गड़ाये रहता है।
बस ये समझ लो वो भी नज़ारे दोनों तरफ लेता रहता है।
सुख की बंसी दोनों को सुनाये येही सलाह देता रहता है।
युद्ध अनर्थ है घर का अच्छा माहौल ध्वस्त है समझ लो जिंदगी व्यर्थ है।
शक्तियां बापिस तरकश में लो और प्रेम काअस्त्र फेंको।
कुछ हो न हो सुख के दो दिन चैन की बंसी बजा लो।
जय हिंद।
✨🌟💫****🙏****✍
शुभ रात्रि।
🌹🌹🌹🌹🌹❣🌹🌹🌹🌹🌹
🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
Comments
Post a Comment