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चल आज रंगों की बात हो जाये थोड़ा गुलाल उड़ाया जाये।
टेसुओं के फूलों को आज फिर पीस के कुछ रंग बनाया जाये।
रात जो बीती टेसुओं को भिगो कर कुछ केसरिया हुआ जाये।
बहुत से फूलों की बहार आयी हुई है चलो कुछ सुखाया जाये।
इन गुलों से कुछ महक ले के अबीर गुलाल पीस पीस बनाया जाये।
कृष्ण के श्याम मलाल को राधा पे रंग डाल मिटाया जाये।
चल चैत्र मास की पूर्वसंध्या पे रंगों संग नववर्ष का स्वागत किया जाये।
मनु भी आये पूरा इतिहास रच लाये चलो उन्हें भी याद किया जाये।
अरे अरे देखो जोधा संग अकबर खेल रहे होली कुछ याद किया जाये।
चलो आज ईद ए गुलाबी आब ए पाशी शाहजहां संग मनाया जाये।
आया रे वसंत झूम झूम के रंगों को इसमें उड़ाया जाये।
चलो काम देव को आमंत्रण दे उन्हें पुनः जीवत किया जाये।
चलो नंदी भृंगी गणों को भी आज रंगों से संवारा जाये।
कुछ रास रंग नाच गाना मृदंग संग बजाय गाया सुरम्या जाये।
बहुतों के गिले शिकवों टूटे बिखरे दिलों को मिलाया जाये।
सब रंगों से भरे इस त्यौहार को सब संग मिल मनाया जाये।
ब्रिज से उठी धूली को कृष्ण संग गुलाल बना उड़ाया जाये।
चलो खेलें होली को प्रेम संग दिल को दिल से मिलाया जाये।
चाहो न चाहो गुजिया का भोग ईश्वर निमित कर लगाया जाये।
जो आये मेरे घर मैं आऊँ जाऊं जिसके घर दिल खोल गुलाल लगाया जाये।
होली मुबारक कह गंगा जमुनी तहजीब को दोहराया जाये।
जय हिंद।
हैप्पी होली।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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