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गुलाल उड़ाया जाये।

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चल आज रंगों की बात हो जाये थोड़ा गुलाल उड़ाया जाये।
टेसुओं के फूलों को आज फिर पीस के कुछ रंग बनाया जाये।
रात जो बीती टेसुओं को भिगो कर कुछ केसरिया हुआ जाये।
बहुत से फूलों की बहार आयी हुई है चलो कुछ सुखाया जाये।
इन गुलों से कुछ महक ले के अबीर गुलाल पीस पीस बनाया जाये।
कृष्ण के श्याम मलाल को राधा पे रंग डाल मिटाया जाये।
चल चैत्र मास की पूर्वसंध्या पे रंगों संग नववर्ष का स्वागत किया जाये।
मनु भी आये पूरा इतिहास रच लाये चलो उन्हें भी याद किया जाये।
अरे अरे देखो जोधा संग अकबर खेल रहे होली कुछ याद किया जाये।
चलो आज ईद ए गुलाबी आब ए पाशी शाहजहां संग मनाया जाये।
आया रे वसंत झूम झूम के रंगों को इसमें उड़ाया जाये।
चलो काम देव को आमंत्रण दे उन्हें पुनः जीवत किया जाये।
चलो नंदी भृंगी गणों को भी आज रंगों से संवारा जाये।
कुछ रास रंग नाच गाना मृदंग संग बजाय गाया सुरम्या जाये।
बहुतों के गिले शिकवों टूटे बिखरे दिलों को मिलाया जाये।
सब रंगों से भरे इस त्यौहार को सब संग मिल मनाया जाये।
ब्रिज से उठी धूली को कृष्ण संग गुलाल बना उड़ाया जाये।
चलो खेलें होली को प्रेम संग दिल को दिल से मिलाया जाये।
चाहो न चाहो गुजिया का भोग ईश्वर निमित कर लगाया जाये।
जो आये मेरे घर मैं आऊँ जाऊं जिसके घर दिल खोल गुलाल लगाया जाये।
होली मुबारक कह गंगा जमुनी तहजीब को दोहराया जाये।
जय हिंद।
हैप्पी होली।
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शुभ रात्रि।
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