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कुछ यूं बीती कुछ यूं गुजरी कुछ कही कुछ सुनी।
जिंदगी बहुत नायाब ही निकली जितनी समझी और सुनी।
हर मोड़ पे इक शख्स उम्र से तजुर्बा लिए खड़ा है।
हम उनसे मुखातिब होते है यहां उम्र जुड़ जाती है।
कुछ आदायें दुनिया की हमपे भी मेहरबां होती है।
हम उनके बहकावे में आते वो हमारी हो जाती है।
वक़्त बे वक़्त दुनिया की हस्तियों से उलझते रहे।
कुछ वो खुद से सुलझ गये बाकी हमे सुलझा गये।
नादान परिंदे भी बहुत मिले नादानियां करते हमे।
हम खुद से नादां हो उन्हें समझदार कहलवा गये।
कुछ तो बेहतरीन मंजरों का भी हमे एहसास हुआ।
कुछ हमने जी लिये बाकी उनके लिए छोड़ आये।
बहुत से गरूर मिले बहुत गरूर टकराये भी हमसे।
कुछ तो हमने गुजरने दिये कुछ की राह बदल दिये।
मोहबतें भी टकराती रही जिंदगी चोट खाती रही।
हम भी मलहम लगाते रहे जिंदगी तुझे संवारते रहे।
वक़्त बहुत जाया हुआ खूबसूरती को समझने में।
खोजी तो भीतर ही छुपी थी जरा धूल में पड़ी थी।
बात बहुत सालों में समझ आयी दुनिया रही पराई।
मोह को लगे हैं सभी प्रेम की किसे कब याद आयी।
कुछ यूं बीती कुछ यूं गुजरी कुछ कही कुछ सुनी।
जिंदगी बहुत नायाब ही निकली जितनी समझी और सुनी।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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