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दुनिया वाकई बहुत बड़ा बाजार है सजा दरबार है।
हर और हर कुछ न कुछ सब कुछ देखो बिक रहा है ।
कीमत देने वाला चाहिए सब मिल रहा सब बिक रहा है।
हर कोई अपनी दुकान सजाए लगाये जो देखो खड़ा है।
कोई दिल बेच रहा है कोई इमान का सौदा कर रहा है।
कोई धर्म की आड़ में फ़क़ीरीं बेच रहा है कोई विश्वास बेच रहा ।
कोई रिश्तों को ही बेच गया कोई लहू का सौदा कर रहा है।
कोई ज्ञान बेच रहा है कोई साधना और ध्यान बेच रहा है।
कोई अपना पेशा बेच रहा है हर कोई अपनी कला बेच रहा है।
कोई चमड़ी बेच के दमड़ी बना रहा है कोई चेहरे बेच रहा है।
अब तो शायद भगवान से लेकर इंसान तक अपनी अदालत बेच रहा है।
कोई पद बेच रहा कोई सच के सहारे भ्रष्टाचार बेच रहा है।
कोई जुमले बेच रहा कोई बर्बाद आंखों को सपने बेच रहा है।
कोई अपनी पहचान हो बेच रहा कोई भूख बेच रहा है।
कोई झूठ पे झूठ बेच रहा बचा तो झूठ का प्रचार बेच रहा है।
कोई संताने बेच रहा कोई तो कोख ही बेच जीवन चला रहा है।
कोई अंग दान में जीवन से खेल अंग बेच रहा कोई
मुफ़्लसी बेच रहा है।
बोलो क्या खरीदोगे ये बाजार ये दुनिया वाकई बहुत बड़ा बाजार बना हुआ है।
हर और हर कुछ न कुछ सब कुछ देखो बिक रहा है ।
मोल देने का दम तो भरो देखो ये संसार बिक रहा है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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