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दर्शक जब तुम बहुत कलात्मक दिखतेे हो तो जोश दिलाते हो।
दर्शक जब तुम बहुत नकारत्मक दिखते हो तो उत्साह गिराते हो।
दर्शक जब तुम बहुत भावात्मक दिखते तो उमंग से भर जाते हो।
दर्शक जब तुम बहुत आलोचक होते तो गलती करते दौड़ा बाहर करते हो।
दर्शक जब तुम हो बहुत गम्भीर नज़र आते तो घबराहट ले लाते हो।
दर्शक जब तुम हो बडे उतेजक शोर शोर कर न जाने किसका दिल दहलाते हो।
दर्शक जब तुम मार्गदर्शक बनते हो मन को बड़े सुहाते हो।
दर्शक जब तुम घोतक होते हो तो कभी लक्ष्य बन सामने आते हो।
दर्शक तुम जब शांत हो जाते हो तूफान आने अंदेशा बन जाते हो ।
दर्शक जब तुम गम्भीर सोच मुद्रा में जाते हो न जाने क्या कर जाते हो।
दर्शक जब तुम दुघर्टना के समय होते हो तो मृत्यु तुल्य से हो आते हो।
दर्शक तुम संगरक्ष क्यों नही हो जाते हो कुछ हिस्सा बन जाते हो।
दर्शक तुम मूक वाणी की परिभाषा से क्यों बाहर नही आते हो।
आज दर्शक दर्शक रहेगा येही रोज़ रोज अपने को कहलवाते हो।
दर्शक चलो हृदय परिवर्तन से तुम्हे जीवंत करते है और दर्शक से योग्य तुम्हे बनाते है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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