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मित्र।

🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹
मित्र को दुख है तो मुझे कब सुख है।
मित्र अगर परेशान है मैं कब खुश हूं।
मित्र को अगर क्रोध है मैं कैसे शांत हूं।
मित्र को अगर भार है मैं कैसे हल्का हूं।

मित्र जीवन का सुख रस सदा सजीव है।
मित्र की राह हर और से सदा ही हसीन है।
मित्र के संग बीते पल हरदम एक नज़ीर है।
मित्र की हर बात बिना शर्त सब मंजूर है।

मित्र के होने से एहसास का भी अंदाज़  है।
मित्र के होने से एक साथ का सदा वास है।
मित्र मेरी ही परछाई बने साथ संग चला है।
मित्र संग से त्योहारों का भी मजा मिला है।

मित्र जहाँ भी हों कहीं यादों में हो सदा यहीं।
मित्र भूलने का सवाल नही ख्याल जाते नही।
मित्र जीवन रस का सबसे हसीन रस है यहीं।
तुम बिन समझ लो दुनिया मे कुछ रंग है नही।

मित्र की व्याख्या की कोई सीमा कभी होती नही।
मित्र मन गहराइयों में उतर सदा बसा मुझमे कही।
मित्र ढूँढू कहाँ इधर उधर जबकी तू छुपा है यहॉं।
मित्र की मित्रता की सामान्य परिभाषा भी है येही।
जय हिंद।
🌟✨💫****🙏****✍
शुभ रात्रि।
❣❣❣❣❣🌹❣❣❣❣❣

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