Skip to main content

कलयुग।

🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹
कहानी बड़ी सुनी अनजानी थी कलयुग की जुवानी थी।
महिमा देखी कलयुग की हर और इसकी कहानी लिखी।
झूठ फरेब धोखे का बोलबाला है कलयुग का  हवाला है।
अच्छे बाबू तेरा मुह सचमुच् सच लिए कलयुग  काला है।

कलयुग में अचार विचार कब के लोग भूले।
कलयुग में आदर एतबार कब का साथ छोड़े।
कलयुग में इज़्ज़त विज़्ज़त कब की सब भूले।
कलयुग में दया इंसानियत कब की सब रूठी।

कलयुग में जलन घृणा ने कब का मन कब्जाया।
कलयुग में द्वेष ने मर्यादाओं की सब सीमा लांघी।
कलयुग में रिश्ते रोज रात को बनते नीलाम होते।
कलयुग में रात कही सोते सुबह को मुह कही धोते।

कलयुग में व्यभचारों ने सब सीमा तमाम लो लांघी।
कलयुग में झूठ का हुआ बोलबाला सच मरजांदी।
कलयुग में नफरत की दुनिया हुई पैसे पे लूटजांदी।
कलयुग में मैं मैं मैं करती दुनिया मैं से ही मिटजांदी।

ये कलयुग के घोर से पहले का बड़ा घोर सा दृश्य है।
कुछ तो संभलो बुरा अंत होना तो मुह बाके खड़ा है।
छल से बाहर झूठ से दूर कर्म के पास मात्र विकल्प है।
वर्ना दोस्तो कलयुग में पतन तो मानुष का निश्चित है।

जय हिंद।
🌟💫✨****🙏****✍
शुभ रात्रि।
❣❣❣❣❣🌹❣❣❣❣❣

Comments

Popular posts from this blog

भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ।

🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए  स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम  से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए  ...

और मुस्कुराना तो है ही।

💐क्या कहें किससे कहें।सब तरफ अपने आप से सब मशगूल हैं ।सब इस तरह की हम कमोबेश काम से ही नज़र आतें है। दौड़ती है जिंदगी कुछ इस रफ्तार से के हम पीछे से छूटे जाते है। कहें दिल की किसस...

जर जोरू जमीन।

🌹🙏🏼🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊✍🏼🌹 बड़ी पुरानी बात चली आयी है दुनिया में तीन ही चीजों को लेकर झगड़ा है "जर जोरू और जमीन" । बड़े ध्यान से आस पास होते घर परिवार समाज में  ज्यादतर झगड़ों का कारण ये ही ...