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ए मुल्क तुझे भी मेरी जरूरत है।
तेरी हर सरहद पे मेरी नज़र पूरी है।
कोई आंख जो उठाए उम्र उसकी पूरी है।
जोश की मुझमे भी कोई कमी नही है।
तेरी हर सरहदों पे समझलो पहरेदारी मेरी है।
जान हथेली पे लेकर हर वक़्त जो चलता हूँ।
तेरी हर टीस को दिल से लगाता हूँ।
तेरे हर दर्द को अपना बनाता हूँ।
तेरी तक़दीर में अपने को ही पाता हूँ।
सोते जागते तुझे अपनी माँ बताता हूँ।
तेरी खुशबू से महकता तुझे पूजता हूँ।
अपनी हर ख्वाइश में तुझे ही पाता हूँ।
कुछ भी कर लूं तेरे इर्दगिर्द मंडराता हूँ।
मेरे हर सुखों की करणी धरती तूँ ही है।
तेरे हर हिस्से को अपने खून से सींचता हूँ।
ये निगाहें सदा तेरी रक्षा में बस टिकी है।
मुझे हर रण के लिए तैयार करती रहती है।
कोई नज़र क्या तुझपे उठाएगा।
जिसने जुर्रत की चूर चूर हो जायेगा।
ये ही मेरी प्रतिज्ञा है तेरी सरहदें सुरक्षित है।
ए मुल्क तुझे भी मेरी जरूरत है।
दुश्मन एक बात समझ ले आज।
तेरी हर सरहद पे नज़र मेरी पूरी है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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