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वक़्त यू ही गुजरता रहा हम किनारे बैठे रहे।
जिंदगी की लहरें टकराती रही हम निहारते रहे।
कुछ उछल के छू जाती हम महसूस करते रहे।
जब बापिस जाती तो ओझल होती देखते रहे।
कुछ मस्ती करती उछाल मारती खुश होते रहे।
किनारों से मिलके बिखरते अस्तित्व देखते रहे।
किनारों पे आ आवाज करती ये शोर सुनते रहे।
लहरों को दिया वो सब लौटा जाती समझते रहे।
लहरों की हर हलचल को जीवन से जोड़ते रहे।
जीवन मृत्यु के सफर को लहरों से समझते रहे।
कहाँ से उठी कब खत्म ये अनुमान लगाते रहे।
न आरंभ न अंत येही निरंतरता है समझते रहे।
फिर सपनो की नाव बना जीवन लहरों पे सवार हुए।
शुरू में हिचकोले खाते आगे बढ़ते झूंझते रहे।
अथाह जीवन राशि को लांघने को प्रयत्नशील रहे।
क्या जीवन की भोर क्या शब पार जाने को आतुर रहे।
लहरों की नज़र से जीवन देखते और समझते रहे।
वक़्त यू ही गुजरता रहा हम किनारे बैठे रहे।
जिंदगी की लहरें टकराती रही हम निहारते रहे।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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