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मंजिलें है हमसे बहुत दूर हमने भी तह करने की ठानी है।
रुकावटें है बहुत मंजिलों में हमने भी पार पाने की ठानी है।
कठनाइयाँ है बहुत मंजिलों में हमने भी लांघने की ठानी है।
परेशानियां है बहुत मंजिलों में हमने भी गुजरने की ठानी है।
रुसवाईयाँ है बहुत मंजिलों में हमने भी सहने की ठानी है।
जग हसाइयाँ है बहुत मंजिलों में हमने हसने की ठानी है।
अकेलापन हैं बहुत मंजिलों में अकेले ही चलने की ठानी है।
दोराहे भी है बहुत मंजिलों में अपनी राह जाने की ठानी है।
मोड़ भी है बहुत मंजिलों में अडिग रह जाने की ठानी है।
घुमाव है बहुत मंजिलों में चकमा दे निकल जाने की ठानी है।
रिश्ते भी है बहुत मंजिलों में हो सके तो निभाने की ठानी है।
व्यसन भी है बहुत मंजिलों में इनसे बच निकलने की ठानी है।
मोहपाश भी है बहुत मंजिलों में शायद बंधे चलने की ठानी है।
घोर काली घटायें है मंजिलों में न डरने की इनसे ठानी है।
बस एक जोश है अब इन मंजिलों पे पहुंचने की ठानी है।
इन मंजिलों पे पहुंचने की ठानी है।
जय हिंद।
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सुप्रभात।
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🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
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