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मंजिलें है हमसे बहुत दूर हमने भी तह करने की ठानी है।
रुकावटें है बहुत मंजिलों में हमने भी पार पाने की ठानी है।
कठनाइयाँ है बहुत मंजिलों में हमने भी लांघने की ठानी है।
परेशानियां है बहुत मंजिलों में हमने भी गुजरने की ठानी है।
रुसवाईयाँ है बहुत मंजिलों में हमने भी सहने की ठानी है।
जग हसाइयाँ है बहुत मंजिलों में हमने हसने की ठानी है।
अकेलापन हैं बहुत मंजिलों में अकेले ही चलने की ठानी है।
दोराहे भी है बहुत मंजिलों में अपनी राह जाने की ठानी है।
मोड़ भी है बहुत मंजिलों में अडिग रह जाने की ठानी है।
घुमाव है बहुत मंजिलों में चकमा दे निकल जाने की ठानी है।
रिश्ते भी है बहुत मंजिलों में हो सके तो निभाने की ठानी है।
व्यसन भी है बहुत मंजिलों में इनसे बच निकलने की ठानी है।
मोहपाश भी है बहुत मंजिलों में शायद बंधे चलने की ठानी है।
घोर काली घटायें है मंजिलों में न डरने की इनसे ठानी है।
बस एक जोश है अब इन मंजिलों पे पहुंचने की ठानी है।
इन मंजिलों पे पहुंचने की ठानी है।
जय हिंद।
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सुप्रभात।
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🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए ...
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