Skip to main content

कुछ खास मशहूर शायरी कलाम आपकी नजर।

🌷🌷🌷🌷🌷🌷💔🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ बहुत खूबसूरत शायरी कलाम  जो लिखा है मुज़्तर ख़ैराबादी ने।
कभी कभी गुनगुना लेते है।

न किसी की आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ।
कसी काम में जो न आ सके मैं वो एक मुश्त-ए-ग़ुबार हूँ ।।

न दवा-ए-दर्द-ए-जिगर हूँ मैं न किसी की मीठी नज़र हूँ मैं।
न इधर हूँ मैं न उधर हूँ मैं न शकेब हूँ न क़रार हूँ ।।

मिरा वक़्त मुझ से बिछड़ गया मिरा रंग-रूप बिगड़ गया।
जो ख़िज़ाँ से बाग़ उजड़ गया मैं उसी की फ़स्ल-ए-बहार हूँ ।।

पए फ़ातिहा कोई आए क्यूँ कोई चार फूल चढ़ाए क्यूँ ।
कोई आ के शम्अ' जलाए क्यूँ मैं वो बेकसी का मज़ार हूँ।।

न मैं लाग हूँ न लगाव हूँ न सुहाग हूँ न सुभाव हूँ ।
जो बिगड़ गया वो बनाव हूँ जो नहीं रहा वो सिंगार हूँ ।।

मैं नहीं हूँ नग़्मा-ए-जाँ-फ़ज़ा मुझे सुन के कोई करेगा क्या।
मैं बड़े बिरोग की हूँ सदा मैं बड़े दुखी की पुकार हूँ ।।

न मैं 'मुज़्तर' उन का हबीब हूँ न मैं 'मुज़्तर' उन का रक़ीब हूँ ।
जो बिगड़ गया वो नसीब हूँ जो उजड़ गया वो दयार हूँ।।

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🙏🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

Comments

Popular posts from this blog

भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ।

🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए  स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम  से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए  ...

और मुस्कुराना तो है ही।

💐क्या कहें किससे कहें।सब तरफ अपने आप से सब मशगूल हैं ।सब इस तरह की हम कमोबेश काम से ही नज़र आतें है। दौड़ती है जिंदगी कुछ इस रफ्तार से के हम पीछे से छूटे जाते है। कहें दिल की किसस...

जर जोरू जमीन।

🌹🙏🏼🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊✍🏼🌹 बड़ी पुरानी बात चली आयी है दुनिया में तीन ही चीजों को लेकर झगड़ा है "जर जोरू और जमीन" । बड़े ध्यान से आस पास होते घर परिवार समाज में  ज्यादतर झगड़ों का कारण ये ही ...