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मोहब्बत अंदाज ए शायराना।

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ओ महाराज सुनो!
कहो मोटू...
एक बार हमे मोहब्बत अंदाज ए शायराना में हो गई।
शब्द झड़ते गए और वो बढ़ती गई।।
सामने वाली जो शरमाई की मोहब्बत और निकल आई।
वो प्यार से पास आई डफ से दो झापड़ लगाई।।
हमारी शायराना मोहब्बत सड़क पे आई।
हमने आव देखा न ताव और जोर से दौड़ लगाई।।
हमारी शायराना मोहब्बत रिस्पॉन्स में जोर बहुत था।
मोहतरमा अपने फोन पे १०० नंबर  घुमाई।।
पुलिस ने हमारे पीछे दौड़  लगाई।
पकड़ कर सुताई करते थाने में ले आई।।
बोली अब हमे भी ये शायराना मोहब्बत दिखाओ भाई।
क्या ऐसा था जो मोहतरमा में तुम्हारी रपट लिखाई?
हमने कहा ! सुन कर छोड़ दोगे न भाई?
बोला हां हां चिंता न करो तुम्हारा कोई अपराध नहीं है भाई।
ये उम्र ही ऐसी है बस मुंह से कुछ का कुछ निकल जाता है।
जो आप जैसे शरीफों को हमारे यहां ले आता है।
अब बोलियागा भी या करें सुताई।
जी बोल रहे है अपनी बात पे रहिएगा पर भाई।
हम सब्जी ले रहे थे वो भी ले रहे थी।
अचानक आंख लड़ गई हमारी  उनसे भाई।
वो शरमाई हम में भी जरा सी ताकत आई।
कभी हम उनको कभी अपनी सब्जी को देखते भाई।
इतने में वो दुकानदार सब समझ गया ।
हमारा ध्यान हटा उसने सब्जी महंगी लगा थमाई।
वो हंस रही थी हमारी नज़र उन्ही पे अटकी हुई थी।
वो एक बार फिर शरमाई और चल दी।
हम भी पीछे हो लिए और उनकी चाल पे बिछ लिए।
और बोले क्या बला की खूबसूरत हो देवी जी।
वो घूमी और घूर के देखी और चल दी भाई।
हमने कहा!जरा सुनिए इस आरज़ू ए दिल को पशेमान न कर के जाइए।
जरा रुकिए और हमारे मुकदस रूह का एहतराम तो कीजिए।
इस जायज से इश्क में कुछ शिरकत तो कीजिए।
ये सुर्ख गालों पे पड़ते गड्डों को जरा हमारा सलाम दीजिए।
इन कयामत से लबरेज होठों को देखने दीजिए।
इन सुरमा ए अबसार के घेरों को जरा नज़र कीजिए।
ये सुनना था के मोहतरमा शरमा गई।
जो शरमा गई तो पट्ट गई  समझो भाई।
इतने में वो पलटी और एक झापड़ रसीद कर दी।
और आप का नंबर घुमा दी।
हमे इस से पहले कुछ समझ आता आपने भी दो धर दी भाई।
हमे अंदाज ए शायराना मोहब्बत के जुर्म में अंदर कर दिया भाई।
कुछ झापड़ और डंडे भी जड़  दिए भाई।
छोटी सी मोहब्बत को अपराध घोषित कर दिया भाई।
सिपाही जी मुस्कुराए और कहे बहुत बड़िया।
क्या ये रोज रोज करते हो मियां?
हम बोले न साहेब ये तो उसकी अदा का कसूर था।
और हम ठहरे अदद शरीफ!
हमारी क्या औकात ये तो जुबान का कसूर था।
वो अदा जो देखी और ये बेशर्म चल गई।
कमबख्त हमे जेल कर गई।
अब आप ही कोई उपाय सुझाईये।
मिया इस बेअदब जुबान से मोहतरमा से माफी मंगवाईये।
किस्मत हुई तो मिल जायेगी।
वर्ना हमे पता है हमारी खिदमत की बारी तुरंत आयेगी।
साहेब ने महिला को कुछ समझाया।
हमने भी बेअदब जुबान खोली।
माफी बोली।
और लो मिल गई।
हमारी शायराना मोहब्बत भी छू से छू मंतर हो गई।
हमने भी खुदा को याद किया।
महंगी सब्जी जो ली थी सिपाही साहेब जी को दे धन्यवाद किया।
अब आप और क्या चाहते हो मित्रो?
सिपाही जी तो हमे समझ गए आप भी समझ जाइए।
हमे भी इज्जाजत दीजिए वर्ना ये मोहब्बत फिर जाग उठेगी।
इस बार तो बच गए आप की दुआ से।
वर्ना अगली बार पक्का मुर्रम्मत करवाएगी।
धन्यवाद।
जय हिंद।
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