🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹
दोस्त बहुत मचलते है मुझसे लड़ते झगड़ते है।
अपने मतवाले पन के लिये मुझसे उलझते है।
जब भी प्रेमशब्द से धोते है कुछ खास लगते है।
कोस कोस न थकते है बड़े सयाने कहलाते है।
अपनी ढपली अपना ढोल जबरदस्ती बजाते है।
मौका मिलते ही कम्बलं कुटाई करवाते है।
हक़ समझ के अपना गाली गुफ्तार कर जाते है।
जबरदस्ती के चोट दे चालाक हमदर्द बन जाते है।
सारे मन की टोह ले प्रिय को ले उड़ जाते है।
जिस पे दिल आये वहीं से राह भटकाते है।
तरसते दिल को आंखों में पढ़ और तरसाते है।
मौज भी लेते है दिल खोल के यार बनाते है।
जो सफा न पढ़ा हो जबरदस्ती याद करवाते है।
इम्तिहान में जितना मुश्किल हो पास करवाते है।
दुख कुछ भी हो हंसते हंसते समय कटवाते है।
नाराज गर्लफ्रैंड को भीबमना सौंप जाते है।
हल्का भी खरोंच लग जाये दिल से सहलाते है।
सारे खेल खेल के अखण्ड पाखण्ड रच जाते है।
मगर हर मोड़ पे राहों में पहले खड़े मिल जाते है।
खूब खींचेते कान मेरे गाली दे दोस्ती निभा जाते है।
हर दुख दर्द के ये साथी खुशी खुशी सब दे जाते है।
मन के मीत दूर होकर भी साथ हमेशा निभाते है।
अब क्या कहूँ यारो दोस्त तो आखिर दोस्त होते है।
हल्की सी आवाज़ करो तुरन्त आ धमकते है।
दो सुनाते लगाते पिटाई याद कराते खड़े हो जाते है।
येही एहसास है के दोस्त मुझे हमेशा याद आते है।
छोटी छोटी खुशियाँ हर पल बिन मांगे दे जाते है।
जय हिंद।
⚡🌟💫✨****🙏****✍
शुभ रात्रि।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹❣🌹🌹🌹🌹🌹🌹
🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है। हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है। मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है। आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...
Wow
ReplyDelete