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ये मेरा मुल्क है लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा।

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ये मेरा मुल्क है लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा।
दिल्ली में दिल है इसका अड़ा।
यहां है इसका मंदिर सबसे बड़ा।
एक छोटा मंदिर भी है देखो खड़ा।
एम सी डी है जिसका नाम पड़ा।
पार्षदों के जामवाड़े से कुछ दिन से पटा पड़ा।
लोकतंत्र में चुने नुमाइंदों का यहां घड़ा बड़ा।
पढ़े लिखे समझदार बुद्धिजीवियों का है ये धड़ा।
वाह क्या नजारा है आज इसके सदन का!
चहों और जूते चप्पल चल रहे है।
शंखनाद हो गया है।
क्या महिला क्या पुरुष पार्षद सब लोकतंत्र के जमकर मजे ले रहे है।
वो देखो एक ने माइक पकड़ा ।
आप ने क्या समझा?
भाई ये उसे तोड़ रहे है।
तभी और जोश आया तो दूसरे भाई को थप्पड़ जड़ रहे है।
ईते में उनको टांग से घसीटा।
वो लुढ़कते नीचे आ रहे है।
अरे कुछ उनका वीडियो बना रहे है।
लोकतंत्र का नजारा सबको दिखा रहे है।
तभी थप्पड़ वाले सरकार को कुछ लोग और नीचे घसीट रहे है।
जूते चप्पल जमकर रसीद कर रहे है।
गीता का ज्ञान चरित्ररार्थ हो रहे है।
भगवन आप भी लोकतंत्र के छोटे मंदिर का भरपूर आनंद ले रहे हो।
पार्षद रूपी गोपियों के संघर्ष को तूल दे रहे हो।
लो ये जोश आ गया उनमें।
लो उसके बाल पकड़ लिए उसने।
चूंडा पाटने का सास समझ के डांटने का वाह साहेब आनंद आ गया।
और लो जोटी लग गई।
कुछ महिलाएं और कूद गई।
वाह एक ने चप्पल निकाली।
सामने वाले को पे दे डाली।लफंड्र समझ के जोर से मार डाली।
अरे सुनो जी।
वो भी आप सा चुन के आया जी।
फर्क इतना वो दूसरी पार्टी की माया जी।
गुस्सा और बढ़ा।
सामने था डाइस पड़ा।
महिला नेत्री को पहलवान सी शक्ति आई।
और वो उसे उठाई ।
लो दे मारा।
घायल हो गया एक पार्षद बेचारा।
जबरदस्त रण संग्राम छिड़ा है।
मेयर साहिबा भांप गई है और समय पे भाग गई है।
हाय हाय लोकतंत्र की हत्या कर गई है।
मंदिर को ध्वस्त करने की ये कोई चाल है।
कोई ये कह रहा था।
हम लोकतंत्र बचा रहे है ये समझा रहा था।
जूते चप्पल लात घुसे डंडे भी चला रहा था।
ये हमारी अभिव्यक्ति की आजादी का सवाल है।
हम पूरी दुनिया को हमारे दिल दिल्ली का हाल सुना रहे है।
सबसे बड़ी डेमोक्रेसी का हाले दिल साहेब दूर से देख रहे है।
मंद मंद मुस्कुरा रहे है।
देखो लोकतंत्र का मंदिर बचा रहे है।
सब लात घूसे चला रहे है।
भगवन भी अब मंद मंद मुस्कुरा रहे है।
इंतजार भी कर रहे है।
देखो कब तुम्हारे लोकतंत्र का घड़ा भरे।
उस दिन का इंतजार कर रहे है।
जो सबक ये पढ़ी लिखी समझदार जनता न सीखा सकी।
उसका बंदोबस्त कर रहे है।
तभी मुझे भी याद आई ..
ये मेरा मुल्क है लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा।
दिल्ली में दिल है इसका अड़ा।
यहां है इसका मंदिर सबसे बड़ा।
एक छोटा मंदिर भी है खड़ा।
एम सी डी है जिसका नाम पड़ा।
जिसे आज पड़ोसी भी देख के मुस्कुरा पड़ा।
बहुत गरियते थे हम पर।
देखो लोकतंत्र के मुंह पर करारा तमाचा है पड़ा।
धन्यवाद।
जी हिंद।
****🙏****✍️
शुभ रात्रि।
"निर्गुणी"
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