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देह गंध।

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देह गंध आज का विषय है। इसपे पढ़ते पढ़ते कुछ रोचक जानकारी मिली।सोचा आप से सांझा करूँ।विषय पढ़ने के बाद शायद आपके दिमाग में कई चीज़ें घूम रही होंगी, लेकिन कुछ भी बताने से पहले में यह साफ कर देना चाहता हूँ कि यहां हम पसीने के कारण शरीर से आ रही गंध की केवल बात नहीं कर रहे। ना ही किसी परफ्यूम को लगाने के बाद आने वाले खुशबूदार सुगंध की बात कर रहे हैं।बात हों रही है प्राकृतिक गंध की।यह प्राकृतिक गंध है जो हर किसी के शरीर से आती है। नवजात बच्चे से लेकर, महिला, पुरुष या वृद्ध हो चुके इंसान के शरीर की गंध भी। और इसी गंध की मदद से एक इंसान, दूसरे इंसान के आसपास होने को भांप लेता है। यह हम कहें कि यह वैज्ञानिक शोध का परिणाम हैं, जिसके मुताबिक एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की गंध की ओर आकर्षित हो जाता है। और हर व्यक्ति की गंध भी अलग अलग होती है।सब को सब की गंध भी नही भाती।परंतु पसंदीदा गंध हमेशा आकर्षित कर लेती है।इसलिए भी इत्र का बाजार आज सबसे महंगा है।ये आकर्षण का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला उपाय है।पर प्राकृतिक गंध हर किसी के शरीर में सदा बनी रहती है इत्र की नही।में अपने पिता को उनकी गंध मात्र से पहचान लेता था।आज भी वो जस की तस बसी है उनको गुजरे 9 साल हुए।उस गंध का ख्याल उनका चित्र आज भी आंखों के सामने जस का तस गढ़ देता है।जिसकी हम संतान है उसकी गंध हमेशा जाने अनजाने खींच भी लेती है।प्राकृतिक गंध की बात हो रही है।पसीने की दुर्गंध की नही। महिला पुरुष समान रूप से आकर्षित होते है।पर कुछ भ्रम भी होते है मर्दों में।अब शायद आप सोच रहे होंगे कि शायद यह प्रवृत्ति महिलाओं में हो, या फिर केवल पुरुषों में क्योंकि विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक होता है। किंतु ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। यह क्वालिटी दोनों में पाई जाती है। यह वैज्ञानिक शोध है।
हाल ही में हुए एक शोध में नवजात बच्चों के कपड़ों की गंध को हिस्सा बनाया गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कैसे एक इंसान दूसरे इंसान की गंध की ओर आकर्षित होता है। आपको इस शोध के परिणाम वाकई हैरान कर सकते हैं।नन्हे बच्चों के कपड़े और शोध के दौरान उन मांओं को चुना गया जिनका कुछ ही समय पहला प्रसव हुआ हो। उनके सामने नन्हे बच्चों के कुछ कपड़े लाकर रख दिए गए, इससे पहले उन्हें उनके खुद के ही बच्चे के कपड़े की गंध सुंघाई गई। बाद में कई सारे कपड़ों में से उन्हें अपने बच्चे की गंध वाला कपड़ा बिना देखे सूंघकर पहचानना था।आश्चर्यजनक परिणाम आये
आप यकीन नहीं कर पाएंगे लेकिन सच में अमूमन सभी महिलाएं एक-एक करके कपड़ों को सूंघती हुई अपने बच्चे के कपड़े पर आकर रुक गईं। यानि कि वह पहचान गईं कि इस कपड़े से आ रही गंध किसी और की नहीं, वरन् उनके अपने बच्चे की ही है।माओं ने कुछ ऐसा महसूस किया ।वैज्ञानिकों के अनुसार इस गंध के नथुने में पहुंचते ही महिलाओं को अजब अनुभूति होती है और वे अपने बच्चे को गोद में लेने के लिए मचल उठती हैं। महिलाओं ने स्वयं इस गंध को दुनिया की सबसे अच्छी गंध बताया है। ऐसे ही कुछ दिलचस्प शोध और भी है।आज तक जीव-जंतुओं की गंध को सूंघकर चीजों को पहचानने की क्षमता के बारे में सुना था। उनकी इस शक्ति को कैसे प्रयोग में लाया जाए, इस पर वैज्ञानिक काम भी कर रहे हैं। इसके लिए रसायन वैसी ही गंध पैदा करते हैं, जो रसायन यह गंध पैदा करते हैं, उन्हें फैरोमॉन कहा जाता है।अन्य जीवों में इन फैरोमॉन रसायनों की उपस्थिति साबित हो चुकी है, लेकिन इंसानों में इसकी मौजूदगी पर एक राय नहीं है और अब तक उनकी मौजूदगी वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हो पाई है। लेकिन कुछ लोगों ने बात का झूठा दावा करके इससे व्यापार करना आरंभ भी कर दिया है। इसलिए परफ्यूम बाजार में कई ऐसे परफ्यूम बिकते हैं, जिनका दावा है कि वे इंसानी फैरोमॉन की गंध बिखेरते हैं और उन्हें लगाने से विपरीत लिंगी आकर्षित हो जाएंगे। यही बात तमाम दूसरे परफ्यूम बनाने वाले भी विज्ञापनों में इस्तेमाल करते हैं, जैसे कि परफ्यूम या डियोडोरेंट लगाने के बाद लड़कियां टूट पड़ती हैं।
झूठे विज्ञापन ।ये विज्ञापन कितने ही झूठे हों, पर वे यह बात तो साबित करते ही हैं कि इंसानी दिमाग में भी गंध का रिश्ता विपरीत लिंगी को आकर्षित करने से है। वहीं कुछ शोध इस बात को साबित करते हैं कि हां, किसी महिला या पुरुष में ऐसी गंध जरूर मौजूद होती है, जिससे विपरीत लिंगी आकर्षित होते हैं।
कभी कभी पुरुषों के पसीने एयर वीर्य की गंध ।इस शोध के अनुसार पुरुषों के पसीने और वीर्ये में मौजूद एंड्रोस्टेडिनॉन नामक रसायन और महिलाओं के मूत्र में मौजूद एस्ट्राटेट्रेनॉल नामक रसायन विपरीत लिंगी को आकर्षित करते हैं। यह बात यूं ही साबित नहीं की गई, इसके लिए कुछ महिला-पुरुषों पर ,खास शोध भी किया गया।महिलाओं के मूत्र की गंध जिसके दौरान कुछ स्त्री-पुरुषों को कंप्यूटर पर कुछ आकृतियों की गतिविधियां दिखाई गईं, जिसका लिंग बताना नामुमकिन था। जब पुरुषों को एस्ट्राटेट्रेनॉल सुंघाया गया, तो उन्हें कंप्यूटर पर मौजूद आकृति स्त्री की मालूम पड़ी और जब महिलाओं को एंड्रोस्टेडिनॉन सुंघाया गया, तो उन्हें आकृति मर्दाना दिखाई पड़ी।
पुरुषों पर एंड्रोस्टेडिनॉन असर नहीं हुआ लेकिन इसके विपरीत पुरुषों पर एंड्रोस्टेडिनॉन और महिलाओं पर एस्ट्राटेट्रेनॉल का कोई असर नहीं हुआ। अब शायद आप सोच रहे होंगे कि जो समलैंगिक महिला-पुरुष हैं, उन्होंने कैसी गंध पहचानी?समलैंगिक भी हुए शामिल
तो आपको बता दें कि अपनी रुचि अनुसार समलैंगिक पुरुषों ने पुरुष गंध और समलैंगिक स्त्रियों ने स्त्री गंध को ही पहचाना। इससे पता चलता है कि मनुष्य जाति अपने विकास क्रम में किसी वक्त अपना साथी चुनने के लिए गंध का इस्तेमाल करती होगी, लेकिन धीरे-धीरे उसकी यह क्षमता कम हो गई या जरूरत ना पड़ने पर खो गई। मगर माँ और नवजात बच्चे का रिश्ता सिर्फ गंध से होता है।बच्चा माँ की गंध तुरन्त पहचान लेता है।जैसे मा अपने बच्चे की।प्राकृतिक गंध सब की अपनी खास होती है।और शरीर से उपजे पसीने की प्राकृतिक दुर्गंध भी।दोनों एक दम अलग और भिन्न रहती है।जो आज भी इसे समझते है अपनो को आंख बंद कर पहचान लेने की क्षमता रखते है।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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