Skip to main content

बोझ।

🌹🙏🏼❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣✍🏼🌹
जीवन मे हर वक़्त कोई न कोई बोझ लिए हम चलते रहते है।ये बोझ कोई अपने आप से कभी नही आते।जाने अनजाने हम इन्हें पैदा करते चलते है।एक सहूलियत का रास्ता हमेशा ढूंढते है।जो हो गया उससे खुश हो लेते है और जो छूट गया उसे भूल जाते है।कुछ मन के चलते छोड़ देते है।कुछ परिस्थितियों के वशीभूत कर देते है। कुछ हम जीवन को वैसे हो सरल मान लेते है।सबसे बडी समस्या दूरदर्शिता की होती है।नज़रिया सबसे पहले हर तरह से संकीर्ण अपना लेते है और जिसके लिये जिम्मेदार है उसपे तवज़्ज़ो कम देते है। हर व्यक्ति आप से उम्मीद लगाए है।ये उम्मीद ज्यदातर हम ही लगवाते है।ये सब बहुत कुछ हम जानते हुए करते है और कम ही बार हम अनजाने में करते है।फिर समय के साथ भूल जाते है।फिर एक समय अचानक आप के ही वायदे छूटे या शेष कार्य या अपने आने वाले समय का गलत अंदाज़ा आप के सामने बहुत से छूटे भूले कार्य एक दम लाकर खड़े कर देता है।जो रोज मिनट घण्टे छोड़े थे अचानक बहुत से घण्टे बन जाते है।आप को अचानक अपने पास समय कम लगने लगता है।हड़बड़ाहट बढ़ जाती है।गलतियों के संभावनाएं भी ज्यादा हो जाती है।और मानिये गलतियां फिर लगातार होती है।दिमाग कभी कभी सुन्न सा महसूस करता है।साहस साथ छोड़ने लगता है।सांस ऊपर नीचे होती है।कभी धड़कन तेज कभी कम होने लगती है।सब अव्यवस्थित लगने लगता है।बहुत से लोग जिम्मेवार अचानक लगने लगते है।अरे उसने कर दिया होता ऐसा हो गया होता इसने कुछ नही किया और सारा बोझ मेरा।और ऐसे बोझ समझदार कर्मठ के हिस्से कभी कभी आते है।कामचोर अहमक के हिस्से हर रोज हर समय हर क्षण आते रहते है।झाड़ पड़ती है।कुछ समझ जाते है और सुधार कर लेते है।बाकी सब भीड़ का हिस्सा सदा बने रहते है।बोझ बोझ चिल्लाते रहते है।अपने दोष दुसरो  पे मढ़ते रहते है।ऐसी भीड़ से दूर राहिये।मन को एकाग्र कीजिये।समय सीमा बांध के समय से काम कीजिये।आज का काम कल पे न छोड़िए।कोई गलत वायदा न कीजिये जो निभाया न जा सके और जिसके लिये झूठ न बोलना पड़े।बोझ कम होने लगेंगे।दिमाग शांत होगा।आप अपने जीवन की मस्ती में लीन ज्यादा होंगे।बाकी आपकी मर्जी।आज की मुलाकात बस इतनी ।
जय हिंद।
****🙏🏼****✍🏼
शुभ रात्रि।
🌹🌹🌹🌹🌹❣🌹🌹🌹🌹🌹

Comments

Popular posts from this blog

अहंकार - भाग ३ 🌹🙏

🌹🙏💫💫💫💫💫💫💫🇮🇳💫💫💫💫💫💫💫🌹✍️ बीते तीन चार दिनों मैं पारिवारिक यात्रा पे रहा। ससुराल के सुख का आनंद लिया। और कुछ अपने संबंधियों से मुलाकात भी की। मैं अपने जन्मस्थान पे हमेशा जाता हूं और वहां भी गया। वहां मेरी रूह बसती है।  हां वहां भी गया जहां जाकर मुझे आत्मिक शांति और अध्यात्म का अनुभव होता है। मां मुझे अपने दर पे आने देती है। मेरे मन की सभी तृष्णाएं और सब अहंकार वहां हवन कुंड में स्वाह हो जाते है।  मैं "मां श्री नयना देवी जी" की बात कर रहा हूं। और ये सत्य है । आप की जहां श्रद्धा आस्था होती है ये सब अपने आप दूर हो जाते है। और एक बात , ईश्वर सब को समय समय पे आइना किसी न किसी रूप में दिखाते रहते है। आस्थावान को इशारा  मिलता है और सुधार होता है। बाकी की आंख पे पट्टी बंध जाती है।   आज महाभारत में दिए ज्ञान को समझने की जरूरत है। जान लीजिए भगवान स्वयं अपने भक्तों का अभिमान दूर करते हैं , फिर वह चाहे उनकी अर्धागिनी सत्यभाभा हों, प्रिय गोपियां हों, अभिन्न मित्र अर्जुन हो, वाहन गरुड़ हो या भक्त नारद हो । भगवान अकिंचन को ही प्राप्त होते हैं अभिमानी को नहीं। अर...

भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ।

🌹🙏❣❣❣❣❣🇮🇳❣❣❣❣❣✍🌹 भारतीय संविधान भाग 9 अनुच्छेद 243 घ। 243 घ. स्थानों का आरक्षण–(1) प्रत्येक पंचायत में– (क) अनुसूचित जातियों ;और (ख) अनुसूचित जनजातियों, के लिए  स्थान आरक्षित रहेंगे और इस प्रकार आरक्षित स्थानों की संख्या का अनुपात , उस पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या से यथाशकक़्य वही होगा जो उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की अथवा उस पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात उस क्षेत्र की कुल जनसंख्या से है और ऐसे स्थान किसी पंचायत में भिन्न-भिन्न निर्वाचन क्षेत्रों को चक्रानुक्रम  से आबंटित किए जा सकेंगे। (2) खंड (1) के अधीन आरक्षित स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान, यथास्थिति , अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित रहेंगे । (3) प्रत्येक पंचायत में प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरे जाने वाले स्थानों की कुल संख्या के कम से कम एक-तिहाई स्थान (जिनके अंतर्गत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियों के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या भी है) स्त्रियों के लिए  ...

और मुस्कुराना तो है ही।

💐क्या कहें किससे कहें।सब तरफ अपने आप से सब मशगूल हैं ।सब इस तरह की हम कमोबेश काम से ही नज़र आतें है। दौड़ती है जिंदगी कुछ इस रफ्तार से के हम पीछे से छूटे जाते है। कहें दिल की किसस...