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बोझ।

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जीवन मे हर वक़्त कोई न कोई बोझ लिए हम चलते रहते है।ये बोझ कोई अपने आप से कभी नही आते।जाने अनजाने हम इन्हें पैदा करते चलते है।एक सहूलियत का रास्ता हमेशा ढूंढते है।जो हो गया उससे खुश हो लेते है और जो छूट गया उसे भूल जाते है।कुछ मन के चलते छोड़ देते है।कुछ परिस्थितियों के वशीभूत कर देते है। कुछ हम जीवन को वैसे हो सरल मान लेते है।सबसे बडी समस्या दूरदर्शिता की होती है।नज़रिया सबसे पहले हर तरह से संकीर्ण अपना लेते है और जिसके लिये जिम्मेदार है उसपे तवज़्ज़ो कम देते है। हर व्यक्ति आप से उम्मीद लगाए है।ये उम्मीद ज्यदातर हम ही लगवाते है।ये सब बहुत कुछ हम जानते हुए करते है और कम ही बार हम अनजाने में करते है।फिर समय के साथ भूल जाते है।फिर एक समय अचानक आप के ही वायदे छूटे या शेष कार्य या अपने आने वाले समय का गलत अंदाज़ा आप के सामने बहुत से छूटे भूले कार्य एक दम लाकर खड़े कर देता है।जो रोज मिनट घण्टे छोड़े थे अचानक बहुत से घण्टे बन जाते है।आप को अचानक अपने पास समय कम लगने लगता है।हड़बड़ाहट बढ़ जाती है।गलतियों के संभावनाएं भी ज्यादा हो जाती है।और मानिये गलतियां फिर लगातार होती है।दिमाग कभी कभी सुन्न सा महसूस करता है।साहस साथ छोड़ने लगता है।सांस ऊपर नीचे होती है।कभी धड़कन तेज कभी कम होने लगती है।सब अव्यवस्थित लगने लगता है।बहुत से लोग जिम्मेवार अचानक लगने लगते है।अरे उसने कर दिया होता ऐसा हो गया होता इसने कुछ नही किया और सारा बोझ मेरा।और ऐसे बोझ समझदार कर्मठ के हिस्से कभी कभी आते है।कामचोर अहमक के हिस्से हर रोज हर समय हर क्षण आते रहते है।झाड़ पड़ती है।कुछ समझ जाते है और सुधार कर लेते है।बाकी सब भीड़ का हिस्सा सदा बने रहते है।बोझ बोझ चिल्लाते रहते है।अपने दोष दुसरो  पे मढ़ते रहते है।ऐसी भीड़ से दूर राहिये।मन को एकाग्र कीजिये।समय सीमा बांध के समय से काम कीजिये।आज का काम कल पे न छोड़िए।कोई गलत वायदा न कीजिये जो निभाया न जा सके और जिसके लिये झूठ न बोलना पड़े।बोझ कम होने लगेंगे।दिमाग शांत होगा।आप अपने जीवन की मस्ती में लीन ज्यादा होंगे।बाकी आपकी मर्जी।आज की मुलाकात बस इतनी ।
जय हिंद।
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शुभ रात्रि।
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